face मासूम बचपन वो धुँधली सी यादें, सतरंगी सपने,वो छोटे से वादे। घर का वो आंगन, और गाँव की गलियां; वो आम के टिकोरे, मटर की वो फलियाँ। धान के खेतों में पौधे लगाना, जौ की फली से घड़ियाँ बनाना। आलू के ठप्पों से रंगीन होली, गुझिया घोड़े हाथी से सजती दीवाली। जाड़ों के दिन और गर्मी की रातें, किरकिट के किस्से और मंदिर में बातें। अमरूद के पेड़ और आम के बगीचे, अपने कंचे छुपाना उस जामुन के नीचे। वो छुपना-छुपाना, पतंगे उड़ाना, चोरी से भैया की साइकिल चलाना। छोटा सा बचपन और लम्बी कहानी, भूतों के किस्से बड़ों की जुबानी। हाथों में पाटी कन्धे पे बस्ता, चवन्नी की चूरन जमाना था सस्ता। वो गुड़ की जलेबी वो सर्कस वो मेले, हर दिल लुभाते बिसाती के ठेले। तालाब किनारे वो मछली पकड़ना, पेड़ों पे चढ़ना ,उल्टा लटकना। वो तिलवा वो ढूंढी और लडुआ की तिकड़ी, बोरी में भर-भर के आती थी खिचड़ी। हँसते-हँसाते ,सपने सजाते, सुहाने से दिन और प्यारी सी रातें। कहाँ छोड़ आया वो मासूम बचपन, वो सोने से दिल और चाँदी सी बातें।।
JHUKI KAMAR KO LATHI KA SAHARA, JARA SI JARA KA HAI YE NAJARA………….. ANKHEN HAI BOJHIL, CHEHRA UDAS SUKHE HAI HOTH, LARJATI AAWAZ KAPKAPATE HAATH, AUR BEDAM BADAN LARKHARATE KADAM, AUR TOOTATE KADAN……….. LEKIN…….. SAPNILI ANKHE AUR GALON PE LALI, GULABI ADHAR JAISE SHARAB KI PYALI BOLI PE USKE KOYAL LAJATI, AUR…… BANTHAN KE JAB WO NIKLE GALI ME, RANJHON KE DIL PER CHAL JATI DARATI….... WO SAMAY THA, YE BHI SAMAY HAI TAB JOSH SE JEET, AB NIRASHA SE BHAY HAI JATAN CHAHE JITNA TU KAR LE PATHIK JWAR AYA HAI GAR TO, BHATA ANA BHI TAY HAI ……..
बैठा हूँ मै सामने , एक जलते हुए दिए के | ह्रदय में उठ रहा है , बस एक ही प्रश्न ? ये दिया है या मैं ही हूँ , या है मेरा अपना ही प्रतिबिम्ब | जो जल रहा है निरंतर , कुछ कहे बिना किसी से | लपटों की लालिमा है , ह्रदय का लहू जैसे | जलती हुयी बाती , तस्वीर है विरह की | किन्तु - स्वयं को जला कर भी , ये शांत है , प्रशांत है | समेटे हुए स्वयं में , अथाह दर्द का सागर ; बिलख रहा निरंतर , ओढ़े प्रसन्नता की चादर | शायद इसी तरह से , मैं भी जल रहा हूँ ; सुकून की तलाश में , दर-दर भटक रहा हूँ सुकून की तलाश में , दर-दर भटक रहा हूँ ||
Comments
Post a Comment